Samstag, 1. Oktober 2011

प्रेम संवाद – 3

अ – क्या तुम्हें मुझसे प्यार है ?

आ – शायद है, शायद नहीं है – क्या पता ?

अ – तुम्हें पता नहीं, तुम्हें मुझसे प्यार है या नहीं ?

आ – कितना कुछ है, क्या मुझे हर बात का पता है ?

अ – लेकिन क्या यह अंदर की बात नहीं है ?

आ – मुझे कैसे पता चलेगा मेरे अंदर क्या है ?

अ – अगर तुम्हें पता नहीं, तो मुझे कैसे पता चलेगा ?

आ – तुम्हें पता चलने से क्या फ़र्क पड़ जाएगा ?

अ – क्यों नहीं, क्या मुझे तुमसे प्यार नहीं है ?

आ – है तो है, क्या उसके लिए मुझे तुमसे प्यार होना ज़रूरी है ?


- उज्ज्वल भट्टाचार्य