गिद्ध क्या वनफूल खाकर जिएगा ?
क्या चाहते हो आख़िर सियार से,
वो भेड़िये की खाल ओढ़ ले ? क्या
अपने दांत उसे खुद खींच निकालने हैं ?
नापसंद क्या है तुम लोगों को
नेतागिरी करने वालों और महंतों में,
बेवकूफ़ों की तरह टकटकी क्या लगाते हो,
क्या देखते हो टेलिवज़न के परदे पर ?
कौन जनरल की पैंट पर
सीता है ख़ून की लकीर ? कौन
अलग करता है मुर्ग़े की टांग तोंदू के सामने ?
कौन टांगता है अकड़कर तमगा
अपनी तौंद के ऊपर ? कौन
लेता है बख़्शीश, चांदी के टुकड़े
चुप रहने की ख़ातिर ? माल
बहुत है चुराया हुआ, चोर नदारद ; कौन
बांटता है तमगे, कौन
तड़पता है झूठ की ख़ातिर ?
आईने में देखो : कायर,
सच्चाई की कशमकश से कतराते हुए,
सीखने को नाकाबिल, सोचने की ज़िम्मेदारी
भेड़ियों के सिपुर्द करते हुए,
नकेल तुम्हारा सबसे क़ीमती गहना,
हर धोखा मंज़ूर तुम्हारी बेवक़ूफ़ी को, किसी ढाढ़स पर
एतराज़ नहीं तुम्हें, हर धौंसबाज़ी
तुम्हारी बरदाश्त के दायरे में.
भेड़ कहीं के, बिरादर हैं
तुम जैसों के, सिर्फ़ कौए :
एक की चमक से दूसरा बदहाल.
भाईचारा क़ायम है
भेड़ियों के बीच :
साथ-साथ चलते हैं उनके चप्पू.
डकैतों की जै-जै : तुम
दावत देते हो बलात्कार को,
गिर पड़ते हो हुक़्मपरस्ती के गंदे बिस्तर पर
पूंछे हिलाते हुए
झूठ बोले जाते हो तुम, बरबाद
होना चाहते हो तुम. तुम
दुनिया को नहीं बदलोगे.
- हन्स माग्नुस एंत्सेन्सबैर्गर
( भविष्य संगीत, राधाकृष्ण प्रकाशन से, अनुवादक : उज्ज्वल भट्टाचार्य )
क्या चाहते हो आख़िर सियार से,
वो भेड़िये की खाल ओढ़ ले ? क्या
अपने दांत उसे खुद खींच निकालने हैं ?
नापसंद क्या है तुम लोगों को
नेतागिरी करने वालों और महंतों में,
बेवकूफ़ों की तरह टकटकी क्या लगाते हो,
क्या देखते हो टेलिवज़न के परदे पर ?
कौन जनरल की पैंट पर
सीता है ख़ून की लकीर ? कौन
अलग करता है मुर्ग़े की टांग तोंदू के सामने ?
कौन टांगता है अकड़कर तमगा
अपनी तौंद के ऊपर ? कौन
लेता है बख़्शीश, चांदी के टुकड़े
चुप रहने की ख़ातिर ? माल
बहुत है चुराया हुआ, चोर नदारद ; कौन
बांटता है तमगे, कौन
तड़पता है झूठ की ख़ातिर ?
आईने में देखो : कायर,
सच्चाई की कशमकश से कतराते हुए,
सीखने को नाकाबिल, सोचने की ज़िम्मेदारी
भेड़ियों के सिपुर्द करते हुए,
नकेल तुम्हारा सबसे क़ीमती गहना,
हर धोखा मंज़ूर तुम्हारी बेवक़ूफ़ी को, किसी ढाढ़स पर
एतराज़ नहीं तुम्हें, हर धौंसबाज़ी
तुम्हारी बरदाश्त के दायरे में.
भेड़ कहीं के, बिरादर हैं
तुम जैसों के, सिर्फ़ कौए :
एक की चमक से दूसरा बदहाल.
भाईचारा क़ायम है
भेड़ियों के बीच :
साथ-साथ चलते हैं उनके चप्पू.
डकैतों की जै-जै : तुम
दावत देते हो बलात्कार को,
गिर पड़ते हो हुक़्मपरस्ती के गंदे बिस्तर पर
पूंछे हिलाते हुए
झूठ बोले जाते हो तुम, बरबाद
होना चाहते हो तुम. तुम
दुनिया को नहीं बदलोगे.
- हन्स माग्नुस एंत्सेन्सबैर्गर
( भविष्य संगीत, राधाकृष्ण प्रकाशन से, अनुवादक : उज्ज्वल भट्टाचार्य )