1- आदत
सुबह अभी हुई नहीं
परिंदे चहचहाते नहीं
टूटी नींद आंखों में लिये हुए
खिड़की के पास पहुंचता हूं
बाहर झांककर कुछ खोजने की कोशिश करता हूं
पास कोई भी न था
जिसे मेरा बर्ताव अजीब लगता
फिर भी शर्मा जाता हूं.
जीने की आदत पड़ जाती है
आदतों के साथ
जो हर गोल-मोल चीज़ को
चौकोर बना देती है
क़िताबों के चार कोने
चार कोने अलमारी के
पलंग के पास छोटा सा गलीचा
उसके भी चार कोने
और चार कोने का पलंग
जिस पर लेटकर
चार कोने की योनि के बारे में सोचते हुए
मैं सो जाता हूं
सपने आते हैं
चौकोने सपने
लेकिन आमतौर पर
उनमें यौनांग नहीं होते.
आदत का तकाज़ा है
आदत डाली जाय
आदत से हटकर कुछ करने की
और मैं
टूटी नींद आंखों में लिये हुए
खिड़की के पास पहुंच जाता हूं.
माफ़ करना दोस्तों,
कोई चारा नहीं इसके सिवा
आदत से लाचार हूं
पास भले ही कोई न हो
शर्मा जाता हूं
शर्म भी आदत है
कोई चारा नहीं इसके सिवा
आदत से लाचार हूं.
2 – ग़लती
परिंदे चहचहाते नहीं
टूटी नींद आंखों में लिये हुए
खिड़की के पास पहुंचता हूं
बाहर झांककर कुछ खोजने की कोशिश करता हूं
पास कोई भी न था
जिसे मेरा बर्ताव अजीब लगता
फिर भी शर्मा जाता हूं.
जीने की आदत पड़ जाती है
आदतों के साथ
जो हर गोल-मोल चीज़ को
चौकोर बना देती है
क़िताबों के चार कोने
चार कोने अलमारी के
पलंग के पास छोटा सा गलीचा
उसके भी चार कोने
और चार कोने का पलंग
जिस पर लेटकर
चार कोने की योनि के बारे में सोचते हुए
मैं सो जाता हूं
सपने आते हैं
चौकोने सपने
लेकिन आमतौर पर
उनमें यौनांग नहीं होते.
आदत का तकाज़ा है
आदत डाली जाय
आदत से हटकर कुछ करने की
और मैं
टूटी नींद आंखों में लिये हुए
खिड़की के पास पहुंच जाता हूं.
माफ़ करना दोस्तों,
कोई चारा नहीं इसके सिवा
आदत से लाचार हूं
पास भले ही कोई न हो
शर्मा जाता हूं
शर्म भी आदत है
कोई चारा नहीं इसके सिवा
आदत से लाचार हूं.
2 – ग़लती
ग़लतियां मुझे ख़ूबसूरत बनाती हैं
ग़लतियां ख़ूबसूरत हैं
ग़लतियां मेरी आदत हैं.
ग़लत रास्ते पर निकल पड़ा
और वो मेरा रास्ता बन गया
ग़लत सपने देखता रहा
और सपने बनते गये
कुछ एक टूटे
कुछ एक याद नहीं रहे
ग़लत फ़ैसले -
ग़लत क़दम -
ग़लत बातें -
ग़लत तरीक़े -
ग़लत तहज़ीब -
ग़लत सोहबत -
कुछ यूं ही बीता मेरा वक़्त
और मेरी ज़िंदगी बनती गई
या जिसे मैंने ज़िंदगी बनाई.
यह कहना ग़लत है
हर मोड़ पर दो रास्ते मिलते हैं,
एक पर चलना लाज़मी होता है.
चल पड़ने के बाद ही पता चलता है
आप किस रास्ते पर हो -
छूटे हुए रास्तों की
याद भर रह जाती है
या नहीं भी रह जाती.
रास्ता मुझसे बहुत छूट चुके
रास्ता नहीं छूटा.
रास्ते आये ग़लती से
शायद वह मेरी
शायद उनकी ग़लती थी
कुछ यूं ही बीता मेरा वक़्त
कुछ यूं ही उनका भी
और कुछ दोनों का.
जो कुछ हुआ मुझे उसका अफ़सोस है -
जो नहीं हुआ उसका अफ़सोस है -
और मैं ख़ुश हूं.
ग़लतियां ख़ूबसूरत हैं
ग़लतियां मेरी आदत हैं.
ग़लत रास्ते पर निकल पड़ा
और वो मेरा रास्ता बन गया
ग़लत सपने देखता रहा
और सपने बनते गये
कुछ एक टूटे
कुछ एक याद नहीं रहे
ग़लत फ़ैसले -
ग़लत क़दम -
ग़लत बातें -
ग़लत तरीक़े -
ग़लत तहज़ीब -
ग़लत सोहबत -
कुछ यूं ही बीता मेरा वक़्त
और मेरी ज़िंदगी बनती गई
या जिसे मैंने ज़िंदगी बनाई.
यह कहना ग़लत है
हर मोड़ पर दो रास्ते मिलते हैं,
एक पर चलना लाज़मी होता है.
चल पड़ने के बाद ही पता चलता है
आप किस रास्ते पर हो -
छूटे हुए रास्तों की
याद भर रह जाती है
या नहीं भी रह जाती.
रास्ता मुझसे बहुत छूट चुके
रास्ता नहीं छूटा.
रास्ते आये ग़लती से
शायद वह मेरी
शायद उनकी ग़लती थी
कुछ यूं ही बीता मेरा वक़्त
कुछ यूं ही उनका भी
और कुछ दोनों का.
जो कुछ हुआ मुझे उसका अफ़सोस है -
जो नहीं हुआ उसका अफ़सोस है -
और मैं ख़ुश हूं.
3 - ख़ुशी
ख़ुशी मेरे साथ आंख-मिचौनी खेलती है
ख़ुशी मेरे साथ आंख-मिचौनी खेलती है
कभी मैं उसके पीछे दौड़ता हूं
कभी वह मेरे पीछे दौड़ती है
कभी वह मेरे साथ होती है -
कभी उसकी याद –
कभी उसकी उम्मीद –
मैं उसे नहीं भूलता
वह मुझे नहीं भूलती.
कभी मैं उदास बैठा होता हूं
उसके बिना
कभी ख़ुशी उदास होती है
मेरे बिना
ख़ुशी कभी आने का वादा नहीं करती
वह आती है
ख़ुशी कभी जाने की धमकी नहीं देती
बस यूं ही चली जाती है
ख़ुशी जब पास होती है
उसका अहसास नहीं होता
सिर्फ़ पता चलता है
वह थी
सिर्फ़ पता चलता है
वह आ रही है.
हां,
मुझे उसका इंतज़ार रहता है.
लेकिन क्या उसे मेरा भी ?
मैं ख़ुश होता हूं जब वह आती है.
क्या ख़ुशी भी ख़ुश होती है ?
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