मेरी उम्मीदों को
तुम्हारी परवाह नहीं
वे तो जीती रहती हैं
क्योंकि उन्हें जीने की चाह है
जीने की आदत है
और वे तब भी ज़िंदा रहेंगी
जब तुम्हारें काले हाथ
उनका गला घोंटने के लिये आगे बढ़ेंगे
तब भी ज़िंदा रहेंगी
जब तुम्हारे सारे मंसूबे
खाक़ होकर याददाश्त बन जाएंगे
और जब तक वे ज़िंदा हैं
तुम्हें परेशान करती रहेंगी
बनी रहेंगी
मेरे ज़िंदा होने की वजह.
तुम्हारी परवाह नहीं
वे तो जीती रहती हैं
क्योंकि उन्हें जीने की चाह है
जीने की आदत है
और वे तब भी ज़िंदा रहेंगी
जब तुम्हारें काले हाथ
उनका गला घोंटने के लिये आगे बढ़ेंगे
तब भी ज़िंदा रहेंगी
जब तुम्हारे सारे मंसूबे
खाक़ होकर याददाश्त बन जाएंगे
और जब तक वे ज़िंदा हैं
तुम्हें परेशान करती रहेंगी
बनी रहेंगी
मेरे ज़िंदा होने की वजह.
Keine Kommentare:
Kommentar veröffentlichen