Donnerstag, 29. September 2011

प्रेम संवाद - 2

अ – दरअसल, प्यार एक अहसास है.

आ – यानी ?

अ – मैं कुछ महसूस करता हूं...तुम्हारे सिलसिले में.

आ – तुम महसूस करते हो. यानी तुम्हारा अहसास है.

अ – बिल्कुल ठीक.

आ – मुझे भूख लगी है.

अ – फिर कुछ खा लिया जाए.

आ – तुम्हें भी भूख लगी है ?

अ – कोई खास नहीं. पर खा लूंगा.

आ – क्योंकि मुझे भूख लगी है ?

अ – हां, वैसे थोड़ी सी भूख मुझे भी है शायद.

आ – तुम्हें पता चला, क्योंकि मुझे भूख लगी है ?

अ – हां, नहीं तो तुम्हें अकेले खाना पड़ेगा.

आ – तुम खाओगे, क्योंकि मुझे भूख लगी है ?

अ – हां, लेकिन ऐसी बात भी नहीं है कि मुझे बिल्कुल भूख नहीं लगी है.

आ – लेकिन तुम्हें भूख नहीं लगी थी.

अ – लेकिन अब लगता है कि थोड़ी सी भूख है.

आ – क्योंकि तुम्हें पता चला कि मुझे भूख लगी है.

अ – हां, बात कुछ ऐसी ही है.

आ – अब मुझे भूख नहीं लग रही है.

अ – क्यों ?

आ – क्योंकि मुझे पता चला कि तुम्हें भूख नहीं लगी थी.


- उज्ज्वल भट्टाचार्य

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