मेरे सीने के अंदर
घड़ी की एक सुई
अपनी कहानी सुनाती रहती है
टिक-टिक, टिक-टिक
और फिर
एक छोटा सा दरवाज़ा खुलता है
एक पंछी सा तुम्हारा चेहरा उभरता है
कहता है
कुक-कुक, कुक-कुक
एक हल्की सी मुस्कान
फैल जाती है
मेरे होठों पर
और उसके बाद
सुनता रहता हूँ
टिक-टिक, टिक-टिक
अपने दिल की कहानी
- उज्ज्वल भट्टाचार्य
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